प्रार्थना की शक्ति में विश्वास रखें: जगदीश गांधी, 85-वर्षीय, कोविद विजयी

लखनऊ : 1 अक्टूबर सिटी मोन्टेसरी स्कूल के संस्थापक-प्रबन्धक 85 वर्षीय डाॅ. जगदीश गाँधी 31 दिनों तक संजय पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट््यूट आॅफ मेडिकल साइंसेज (एसजीपीजीआई) में कोरोना को मात देकर 3 सितम्बर को अपने घर वापस गये। एसजीपीजीआई में महीने भर रहने के दौरान अपने अनुभव को साझा करते हुए डाॅ गांधी बताते है कि ‘‘मैंने अपने वार्ड के कम से कम 10 लोगों को कोरोना वायरस से जंग हारते हुए देखा। कई लोगों से मेरी दोस्ती थी। इस घटना ने मुझे झकझोर कर रख दिया कि एक व्यक्ति जिसके साथ मैं कल रात हँस-बोल रहा था, आज सुबह वह नहीं था।’’

         उन्होंने बताया कि ‘‘इस 31 दिन के कठिन समय को बिताने के लिए मैंने एक ओर प्रार्थना, भजन का सहारा लिया तो वहीं दूसरी ओर आध्यात्मिक पुस्तकों और समाचार पत्रों को भी पढ़ा करता था। डाॅ गाँधी बताते हैं कि 4 अगस्त को कोरोना वायरस से संक्रमण की रिपोर्ट आने के बाद मुझे एसजीपीजीआई ले जाने के लिए एम्बुलेंस गयी। उसी समय से मैंने अपना सारा ध्यान अपने भगवानबहाउल्लाह की प्रार्थना पर केन्द्रित कर दिया, जिनकी शिक्षाओं को मैंने अपने जीवन मंे आत्मसात् कर रखा है। मैंने उनसे इस वायरस से लड़ने के लिए शक्ति और उनका आशीर्वाद मांगा। मुझे विश्वास था कि वे मेरी सहायता जरूर करेंगे और उनके आशीर्वाद से मैं जल्दी ही कोरोना वायरस के संक्रमण को हरा दूँगा। उनके प्रति मेरा विश्वास एक पल के लिए कभी भी नहीं डगमगाया और आज अगर मैं स्वस्थ होकर आप सबके बीच वापस आया हूँ तो इसमें डाॅक्टरों, नर्सों और पैरामेडिकल स्टाॅफ का तो योगदान है ही, किन्तु जिसने मुझे इस भयंकर वायरस से लड़ने की सबसे ज्यादा शक्ति दी, वह था भगवान बहाउल्लाह का आशीर्वाद और उनकी प्रार्थना।  

            मुझे पता चला कि सीएमएस के कर्मचारी, मेरे छात्र और उनके माता-पिता दिन में कई बार मेरे जल्दी और पूरी तरह से ठीक होने के लिए प्रार्थना कर रहे थे, जिसके लिए मैं हमेशा उन सभी का आभारी रहूंगा। इसके साथ ही मैं अपने डाॅक्टरों, नर्सों और पैरामेडिकल स्टाॅफ जैसे कोरोना योद्धाओं का विशेष रूप शुक्रिया अदा करता हूँ, जो हमको और आपको सुरक्षित रखने के लिए हर रोज बलिदान करते रहे हैं।

मैं सभी लोगों को यह संदेश देना चाहता हूँ कि प्रार्थना में बहुत शक्ति होती है। वास्तव में जो भगवान का प्यार आपके लिए है उससे बड़ा प्यार दुनियाँ में कोई हो ही नहीं सकता। इसलिए हमें अपनी प्रार्थना की शक्ति पर अटूट विश्वास करना चाहिए। दुनियाँ में इससे बड़ी कोई भी शक्ति नहीं है।

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