मानव स्थापना का अंतिम लक्ष्य आध्यात्मिक सभ्यता की स्थापना के साथ पूरा होगा


 अंतर्राष्ट्रीय शांति शिक्षा पुरस्कारसे सम्मानित
विश्वविख्यात शिक्षाविद् डाॅ. जगदीश गाँधी, संस्थापक-प्रबन्धक,
सिटी मोन्टेसरी स्कूल, लखनऊ का युगानुकूल तथा वैश्विक समाधान
प्रेरक साक्षात्कार
द्वारा - संजीव कुमार शुक्ला, वरिष्ठ पत्रकार, लखनऊ
प्रश्नः (1) आप अपनी सम्पत्ति को कब से और प्रतिवर्ष किसकी प्रेरणा से घोषित करते रहे हैं?
उत्तर: हमारा मानना है कि किसी भी जन सेवक को व्यक्तिगत, सामाजिक तथा आर्थिक रूप से पारदर्शी होना चाहिए। इसी तथ्य को स्वीकार करते हुए हम सन् 2001 से प्रतिवर्ष अपनी वेबसाइट www.jagdishgandhiforworldhappiness.org आपकी सुविधा के लिए वेबसाइट का नाम स्पेस के साथ इस प्रकार पढ़ने की कृपा करें www. jagdish gandhi for world happiness. org पर तथा लखनऊ के समाचार पत्रों के माध्यम से 31 मार्च तक की अपनी व्यक्तिगत सम्पत्ति की घोषणा अप्रैल माह के प्रथम सप्ताह में करते रहे हैं। इस समय हमारे पास व्यक्तिगत कुल सम्पत्ति 20 लाख 72 हजार रूपयों की है। इसके अतिरिक्त हमारे पास कोई भी व्यक्तिगत भूमि, भवन या प्रापर्टी नहीं है। हम विगत 61 वर्षों से 12, स्टेशन रोड, लखनऊ में किराये के मकान में रहते हैं। हमारे पास किसी भी प्रकार की विदेशी मुद्रा, सोना, चांदी या किसी भी प्रकार के आभूषण नहीं है। तथा किसी भी बैंक में कोई लाॅकर नहीं है। किसी भी बैंक में हमारा कोई करेन्ट एकाउन्ट नहीं है। और ही किसी भी बैंक आदि में कोई फिक्स डिपाॅजिट है। इस प्रकार उपरोक्त के अलावा हमारे पास इस संसार में कही भी और कोई भी सम्पत्ति नहीं है। मेरा सम्पूर्ण जीवन एक खुली किताब की तरह है। हमने सारी जिंदगी अपने को नहीं बल्कि अपने बच्चों के मस्तिष्क मेंवसुधैव कुटुम्बकम्औरजय जगत्के गुणों का बीजारोपण करके उन्हें विश्व नागरिक के रूप में विकसित करके अपने स्कूल को संसार में सबसे बड़ा बनाया है।

प्रश्नः (2) यह जानकर बहुत आश्चर्य होता है कि आप सन् 1969 से 1974 तक पांच साल तक अलीगढ़ जिले के सिकन्दराराऊ क्षेत्र से उत्तर प्रदेश में निर्दलीय विधायक (एम.एल..) रहे हैं। इसके साथ ही आप 61 वर्षों से संसार के सबसे बड़े स्कूल सिटी मोन्टेसरी स्कूल, लखनऊ (सी.एम.एस.) के संस्थापक-प्रबन्धक हैं। इसके बावजूद आपके पास अपना कोई निजी मकान या बड़ी सम्पत्ति नहीं है। शिक्षा के प्रति इस समर्पण तथा त्याग की कोई ख़ास वजह है?
उत्तरः     मैंने तथा मेरी पत्नी डा. भारती गांधी ने 8 जुलाई, 1959 को सिटी मोन्टेसरी स्कूल की शुरूआत 300 रूपये उधार लेकर 5 बच्चों के साथ की थी। शुरू से ही हमारा यह विश्वास है किबच्चों की शिक्षासंसार की समस्त संभव सेवाओं में से, जो परमात्मा को अर्पित की जा सकती है, उनमें से सर्वश्रेष्ठ सेवा है। इस युग के अवतार बहाउल्लाह ने कहा है कि:
               ष्।उवदह जीम ळतमंजमेज िंसस जीम हतमंज ेमतअपबमे जींज बंद चवेेपइसल इम तमदकमतमक इल उंद जव ।सउपहीजल ळवक पे जीम मकनबंजपवद िबीपसकतमदए इनपसकपदह जीमपत बींतंबजमत ंदक पदबनसबंजपदह पद जीमपत जमदकमत ीमंतजे जीम सवअम िळवकण्ष्  हिन्दी भावार्थ -सर्वशक्तिमान परमेश्वर को मनुष्य की ओर से अर्पित की जाने वाली समस्त सम्भव सेवाओं में से सर्वाधिक महान सेवा है- () बच्चों की शिक्षा, () उनके चरित्र का निर्माण तथा () उनके हृदय में परमात्मा के प्रति अटूट प्रेम उत्पन्न करना। और हम सी.एम.एस. की शिक्षा के माध्यम से प्रत्येक बच्चे को सर्वश्रेष्ठ भौतिक शिक्षा के साथ ही मानवीय और आध्यात्मिक शिक्षा भी प्रदान करके उसे प्रभु भक्त और एक अच्छा इंसान बनाकर प्रभु सेवा का काम कर रहे हैं। इस प्रकार शिक्षा हमारा व्यवसाय नहीं है। हम सी.एम.एस. को व्यक्तिगत लाभ के लिए नहीं बल्कि प्रभु सेवा के लिए चला रहे हैं।
प्रश्नः(3) आप अपने विद्यालय सी.एम.एस. के माध्यम से विश्व में एकता स्थापित करने के लिए अपने देश की प्राचीन एवं महान संस्कृतिवसुधैव कुटुम्बकम्’, ‘जय जगतएवं भारतीय संविधान के विश्व एकता के प्राविधानअनुच्छेद 51 ;।तजपबसम 51द्धष् की शिक्षा अपने छात्रों को दे रहे हैं। क्या इन शिक्षाओं को छात्रों को देने से विश्व में एकता स्थापित हो जायेगी?
उत्तरः     भारत कीवसुधैव कुटुम्बकम की प्राचीन एवं महान संस्कृति पर आधारित भारतीय संविधान का अनुच्छेद 51 हमारे देश को विश्व के अन्य देशों से अलग एक विशिष्ट स्थान दिलाता है। विश्व एकता का ऐसा अनूठा प्राविधान संसार के किसी भी अन्य देश के संविधान में नहीं है। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 51 के अनुसार:
               भारत के प्रत्येक नागरिक एवं राज्य का यह उत्तरदायित्व है कि वह -
               ()          अन्तर्राष्ट्रीय शान्ति और सुरक्षा की अभिवृद्धि करेगा,
               (बी)         राष्ट्रों के बीच न्यायसंगत और सम्मानपूर्ण संबंधों को बनाए रखने का प्रयत्न करेगा,
               (सी)         अन्तर्राष्ट्रीय कानून का सम्मान करेगा अर्थात उसका पालन करेगा तथा
               (डी)         अन्तर्राष्ट्रीय विवादों को माध्यस्थम् द्वारा निपटारे का प्रयास करेगा।
               इस प्रकार भारत का संविधान विश्व का एकमात्र ऐसा संविधान है, जिसके अनुच्छेद 51 में अन्तर्राष्ट्रीय कानून के प्रति सम्मान एवं अन्तर्राष्ट्रीय कानून बनाने हेतुविश्व संसदबनाने की आवश्यकता की ओर जनमानस का ध्यान आकर्षित किया गया है।
               हम सी.एम.एस. की शिक्षा के माध्यम से बाल्यावस्था से ही प्रत्येक बच्चे के मस्तिष्क में पारिवारिक एकता, धार्मिक एकता एवं विश्व एकता के विचारों का भी बीजारोपण कर रहे हैं। इसके लिए हम अपने प्रत्येक शैक्षिक समारोह के प्रारम्भ में बच्चों से विश्व संसद, सर्वधर्म प्रार्थना एवं विश्व एकता की प्रार्थना के कार्यक्रम आयोजित करवाते है ताकि बाल्यावस्था से ही ये ईश्वरीय एवं सार्वभौमिक विचार प्रत्येक बच्चे के संस्कारों में स्थायी रूप से स्थापित हो जाये और बड़े होकर वे ईश्वर भक्त बनें तथा विश्व संसद स्थापित कर विश्व में स्थायी रूप से एकता तथा शान्ति लायें। मेरा यह पूरा विश्वास है कि आने वाले समय में सी.एम.एस. के बच्चे बड़े होकर विश्व के सभी राष्ट्रों के बीच एकता अवश्य स्थापित करेंगे। 
               इसलिए महाविनाश की ओर तेजी से बढ़ती इस दुनियाँ को बचाने के लिएवसुधैव कुटुम्बकम्’, ‘जय जगतएवं भारतीय संविधान के अनुच्छेद 51 केविचारको सारे संसार में फैलाने तथा विश्व संसद के गठन के लिए काम करने का समय अब गया है। 
प्रश्नः (4) आप 1959 में लखनऊ विश्वविद्यालय छात्र संघ के अध्यक्ष रहे हैं। अध्यक्ष चुने जाने के बाद शपथ ग्रहण समारोह में आपके निमंत्रण पर भारत के तात्कालीन प्रधानमंत्री पं0 जवाहर लाल नेहरू जी मुख्य अतिथि के रूप में पधारे थे।
               उसके बाद आप स्वयं भी 1969 से 1974 तक 5 वर्षों के लिए उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले के सिकन्दराराऊ क्षेत्र से निर्दलीय विधायक चुने गये। इस दौरान आपने श्री वी. वी. गिरी जी को भारत के राष्ट्रपति पद के चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में खड़ा किया और वे संसार के प्रथम निर्दलीय राष्ट्रपति चुने गये। राजनीति में इतनी गहरी अभिरूचि होने के बावजूद भी आपने राजनीति क्यों छोड़ दी? जबकि राजनीति में एक बार जाने के बाद कोई भी राजनैतिक नेता कभी भी राजनीति नहीं छोड़ता है।
उत्तरः     इस सन्दर्भ में मैं आपको बताना चाहूँगा कि विधायक रहते हुए ही मैं आज से 46 वर्ष पूर्व 1974 में एक शैक्षिक सम्मेलन में भाग लेने के लिए इंग्लैण्ड गया था। वहाँ जाकर लन्दन में मैंने इण्डिया इन्टरनेशनल क्लब की स्थापना की एवं इसी क्लब के माध्यम से मैंने वहाँ 17, 18 19 दिसम्बर, 1974 को ईलिंग टाउनहाल के प्रसिद्ध विक्टोरिया हाल, लन्दन मेंशिक्षा द्वारा विश्व शान्तिविषय पर तीन दिवसीय द्वितीयइण्टरनेशनल यूथ कान्फ्रेन्स’ ;2दक प्दजमतदंजपवदंस ल्वनजी ब्वदमितमदबम वद ॅवतसक च्मंबम जीतवनही म्कनबंजपवदद्ध का सफलतापूर्वक आयोजन किया।
               इस सम्मेलन में विश्व के 47 देशों के इंग्लैण्ड निवासी 220 युवकों ने हिस्सा लिया था। लंदन में ही 19 दिसम्बर, 1974 को मैंने विश्व सरकार के गठन के लिए प्दजमतदंजपवदंस थ्वतनउ वित ॅवतसक ळवअमतमदउमदज की स्थापना की। जिसमें इंग्लैण्ड निवासी विश्व के 20 देशों के 109 प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
               उस सम्मेलन में कुछ बहाई युवकों ने अपने सम्बोधन में बताया कि पारिवारिक एकता, धार्मिक एकता एवं विश्व एकता आज के युग की सबसे बड़ी आवश्यकता है। सम्पूर्ण मानव जाति की एकता के इन बहाई विचारों से मैं और मेरी पत्नी श्रीमती भारती गाँधी अत्यधिक प्रभावित हुए और लंदन में ही हम दोनों ने बहाई धर्म स्वीकार कर लिया। बहाई धर्म की शिक्षाओं में कहा गया है कि ईश्वर एक है, सभी धर्म एक हैं तथा सम्पूर्ण मानवजाति एक ही परमपिता परमात्मा की संतानें हैं।
               बहाई धर्म में राजनीति में भाग लेने की मनाही है। बहाई धर्म का मानना है कि राजनीति में सामान्यतया अपनी प्रशंसा तथा दूसरों की बुराई की जाती है, जो आत्मा के विकास में बाधक है। वर्ष 1977 में बहाई धर्म की शिक्षाओं से विमुख होकर मैंने एक बार फिर से उत्तर प्रदेश विधान सभा का उप-चुनाव लड़ने का निर्णय किया। किन्तु मेरी बेटी गीता गाँधी किंगडन, जो कि उस समय केवल 14 वर्ष की थी, बेटी गीता ने मुझे स्मरण दिलाया कि बहाई धर्म में राजनीति की मनाही है, क्योंकि राजनीति द्वारा आत्मा का विकास मुश्किल है।
               उसने मुझसे कहा पापा, यदि आप बहाई धर्म की शिक्षाओं के विपरीत जाकर राजनीति में फिर से भाग लेंगे तो आपने बहाई धर्म के द्वारा हमें जो मानव जाति की सेवा करने का महान एवं नैतिक लक्ष्य दिया है, उसका क्या होगा? हमने बहाई धर्म को स्वीकार करके इसके संस्थापक बहाउल्लाह के प्रति जो विश्वास व्यक्त किया है, हमारे उस विश्वास का क्या होगा? तथा आप मेरे पिता हैं और आपके प्रति मेरे विश्वास का क्या होगा? तब मेरे मस्तिष्क में यह विचार आया कि मैं किसी भी कीमत पर अपनी बेटी का जो बहाई धर्म एवं उसके संस्थापक बहाउल्लाह के प्रति अटूट विश्वास है, उसको कम नहीं होने दूंगा और मैंने उसी दिन से राजनीति को सदैव के लिए त्याग दिया।
               इसके बाद मैंने अपनी आत्मा को विनाश होने से बचाने के लिए और अपनी आत्मा के विकास में सर्वाधिक योगदान देने के लिए अपनी बेटी गीता गांधी को अपनीआध्यात्मिक माँमानते हुए बच्चों की शिक्षा को ही अपने जीवन का परम ध्येय एवं एकमात्र उद्देश्य बना लिया।                  
               प्रश्नः (5) आपके जीवन में महात्मा गांधी जी और संत विनोबा भावे जी के जीवन एवं उनकी शिक्षाओं का                क्या प्रभाव पड़ा और क्यों?
उत्तरः     मैं बचपन से ही महात्मा गांधी जी की सत्य, अहिंसा, सेवा, सादगी एवं सर्व-धर्म समभाव की शिक्षाओं तथा उनके आध्यात्मिक शिष्य संत विनोबा भावे कीजय जगत्की अवधारणा से अत्यधिक प्रभावित रहा हूँ।
               मेरा जन्म उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले के बरसौली गांव में 10 नवम्बर, 1936 को एक गरीब खेतिहर परिवार में हुआ है। मेरी माता स्व. श्रीमती बासमती देवी एक धर्म परायण महिला थीं। और मेरे पिता स्व0 श्री फूलचन्द्र अग्रवाल जी गाँव के लेखपाल थे। मेरे चाचाजी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी थे। वे महात्मा गाँधी जी के परम अनुयायी थे और वे मुझे बचपन से ही महात्मा गांधी जी के जीवन से जुड़ी हुई अनेक प्रेरणादायी कहानियों एवं शिक्षाओं को सुनाया करते थे, जिनका बचपन से ही मेरे जीवन पर बहुत गहरा प्रभाव पड़ा।
               महात्मा गाँधी जी का विश्वास था कियदि आप विश्व में वास्तविक शांति चाहते हैं, तथा यदि आप युद्धों के विरूद्ध वास्तविक युद्ध छेड़ना चाहते हैं तो आपको इसकी शुरूआत बच्चों से ही करनी होगी।महात्मा गाँधी के इन्हीं शब्दों और संत विनोबा भावे जी केजय जगत्की अवधारणा से प्रेरित होकर मैंने सारे विश्व में शांति एवं एकता की स्थापना के लिए बच्चों की शिक्षा को ही अपनी सेवा का माध्यम बनाया।
               इसके साथ ही मेरे जीवन पर संत विनोबा भावे जी उनकीजय जगत्’ (विश्व की जय हो) की अवधारणा का भी अत्यधिक प्रभाव पड़ा। बताते हैं कि एक बार जय जगत् के बारे में संत विनोबा भावे जी से किसी ने पूछा कि दो राष्ट्रों के बीच झगड़ा होने से कोई एक राष्ट्र हारेगा तथा कोई एक राष्ट्र जीतेगा। ऐसे में सारे जगत् की जय (विजय) कैसे होगी? तब उन्होंने कहा था कि बच्चों के सुरक्षित भविष्य की ख़ातिर यदि विश्व के सभी देश यह बात हृदय से स्वीकार कर लें कि आपस में लड़ना ठीक नहीं है तो सारे विश्व मेंजय जगत्हो जायेगी। अर्थात यदि दो राष्ट्र मिलकरजय जगत्की भावना से आपसी परामर्श करें तो किसी एक राष्ट्र की हार-जीत नहीं बल्कि सभी राष्ट्रों की जीत होगी।
               महात्मा गांधी के शिष्य संत विनोबा भावे के इसीजय जगत्’ (विश्व की जय हो) के नारे को हमारे विद्यालय ने अपनी स्थापना के समय से ही आदर्श वाक्य (उवजजव) के रूप में अपनाया है और वर्ष 1959 में सी.एम.एस. में सबसे पहले दाखिल हुए 5 छात्रों की स्लेट मेंजय जगत्लिखकर पढ़ाई की शुरूआत कराई गयी थी। इस प्रकार विगत 61 वर्षों से हम अपने बच्चों के मन-मस्तिष्क में जय जगत् की अवधारणा का भी बीजारोपण कर रहे हैं।
प्रश्नः (6) किस घटना के कारण आपने अपना नाम जगदीश प्रसाद अग्रवाल से बदलकर जगदीश गांधी रख लिया?
उत्तरः     15 अगस्त 1947 को आजादी मिलने के साढ़े पांच महीने के अन्दर ही 30 जनवरी, 1948 को महात्मा गाँधी जी की हत्या का हृदय-विदारक समाचार सुनकर मेरा मन अत्यन्त विचलित हो उठा। उस समय मैं कक्षा 6 का छात्र था। मैंने उसी समय महात्मा गाँधी जी की शिक्षाओं को अपने जीवन का आदर्श बनाने का निर्णय ले लिया। जिसके बाद मैंने सबसे पहले अपने पिता जी की सहमति से विद्यालय के प्रधानाचार्य को पत्र लिखकर अपना नामजगदीश प्रसाद अग्रवालसे बदलकरजगदीश गाँधीकरने का निवेदन किया। इसके साथ ही मैंने जीवन-पर्यन्त महात्मा गाँधी जी की शिक्षाओं पर चलने का संकल्प भी लिया। तब से लोग मुझेजगदीश गाँधीके नाम से ही जानते हैं और तभी से मैं अधिकांशतया खादी के वस्त्र पहनता हूँ। मेरा मानना है कि खादी वस्त्र ही नहीं एक व्यापक सेवा का विचार है।
प्रश्नः (7) आपका विद्यालय सी.एम.एस. अंग्रेंजी माध्यम से अपने बच्चों को शिक्षा दे रहा है। सी.एम.एस. भारतीय संस्कारों के अनुकूल हिन्दी भाषा में बच्चों को शिक्षा क्यों नहीं दे रहा है?
उत्तरः     हमारा मानना है कि वर्तमान समय में संसार के प्रत्येक बालक को उसकी मातृ भाषा एवं राष्ट्र भाषा के साथ ही विश्व भाषा के रूप में अंग्रेजी भाषा का ज्ञान कराना अति आवश्यक है। विज्ञान और तकनीक के इस वैश्विक युग में संवाद स्थापित करने के लिए राष्ट्रों की सीमाओं एवं दूरियों का महत्व धीरे-धीरे खत्म हो गया है।
               आज इण्टरनेट के माध्यम से आप जब भी चाहे किसी अन्य देश के नागरिक से सीधे संवाद स्थापित कर सकते हैं। इसमें अगर कोई बाधा है तो वह है भाषा की बाधा। अगर संवाद स्थापित करने वाले दोनों देशों के लोगांे को एक अन्तर्राष्ट्रीय भाषा का ज्ञान नहीं है, तो वे आपस में सीधे बात नहीं कर पायेंगे। वैश्विक स्तर पर भाषा की इस बाधा को समाप्त करने के लिए जरूरी है कि विश्व की एक अंतर्राष्ट्रीय भाषा हो। ऐसे में अंग्रेंजी एक ऐसी भाषा है, जो कि सारे विश्व में सबसे अधिक देशों में बोली तथा समझी जाती है। अंग्रेजी अब विश्व की लिंक भाषा अर्थात सम्पर्क भाषा बन गयी है।
               इसलिए सी.एम.एस. विगत 61 वर्षों से एक ओर जहां अपने बच्चों को विश्व नागरिक के रूप में विकसित कर रहा है तो वहीं दूसरी ओर उन्हें सर्वाधिक अंतराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में प्रतिभाग करने और उन्हें विश्व के किसी भी देश में जाकर उच्च शिक्षा लेने के लिए अपनी सेवाओं को देने के लिए अंगे्रंजी भाषा तथा आधुनिक तकनीक का भी सम्पूर्ण ज्ञान करा रहा है।
               रही बात विश्व बंधुत्व के संस्कार और उसके पीछे की सोच की तो इसके मूल में हमारे देश कीवसुधैव कुटुम्बम्जय जगतकी प्राचीन संस्कृति, स्वर्णिम सभ्यता और भारतीय संविधान के अनुच्छेद 51 का विशेष महत्व है। आज सारे विश्व की अन्तर्राष्ट्रीय समस्याओं का समाधान भारत कीवसुधैव कुटुम्बकम्की प्राचीन संस्कृति, जय जगत् की महान अवधारणा और भारतीय संविधान के अनुच्छेद 51 में ही निहित है। इसीलिए हम अपने बच्चों को बचपन से हीजय जगत्औरविश्व बंधुत्वकी शिक्षा देने के साथ ही उन्हें भारतीय संविधान के अनुच्छेद 51 की पवित्र भावना को अपने जीवन में आत्मसात् करने के लिए प्रेरित करते रहे हैं।
               इसके लिए हमारा विद्यालय विगत 20 वर्षों से प्रत्येक वर्ष विश्व के मुख्य न्यायाधीशों का अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन भी आयोजित करते रहा है, जिसका मुख्य उद्देश्य एक वैश्विक लोकतांत्रिक व्यवस्था का गठन अर्थात अन्तर्राष्ट्रीय समस्याओं के समाधान हेतु एक विश्व संसद, विश्व सरकार और विश्व न्यायालय की स्थापना है।
               सी.एम.एस. द्वारा अभी तक आयोजित विश्व के मुख्य न्यायाधीशों के 20 अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में अब तक विश्वप्रसिद्ध धार्मिक गुरू दलाई लामा के साथ ही विश्व के 136 देशों के 1300 से अधिक मुख्य न्यायाधीश, न्यायाधीश, कानूनविद् तथा राष्ट्राध्यक्ष आदि प्रतिभाग करके विश्व के 2.5 अरब बच्चों के साथ ही आगे आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य के लिए विश्व संसद के गठन की मांग कर चुके हैं।
प्रश्नः (8) आधुनिक वैश्विक युग की आवश्यकता के अनुकूल सीएमएस विगत कई वर्षों से छात्रों को विश्व एकता से ओतप्रोत गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के कारण गिनीज बुक आॅफ वल्र्ड रिकार्ड के अनुसार संसार का सबसे बड़ा विद्यालय बन गया है। विगत 61 वर्षों से आपके विद्यालय सेजय जगत्औरवसुधैव कुटुम्बकम्का व्यापक दृष्टिकोण विकसित करके निकले कई लाख छात्र-छात्रायें वर्तमान में अपने देश के साथ ही विश्व के अनेक देशों में अपने देश कीवसुधैव कुटुम्बकम की महान संस्कृति के अनुरूप महत्वपूर्ण पदों का दायित्व सफलतापूर्वक निभा रहे हैं। क्या बच्चों को विश्व नागरिक के रूप में विकसित करने के अभियान में आप अपने को सफल मानते हैं?

उत्तरः     महोदय, आज हमारा विद्यालय गिनीज बुक आॅफ वल्र्ड में एक ही शहर में सबसे अधिक (वर्तमान में 56,000 से अधिक) बच्चों वाले विश्व के सबसे बड़े विद्यालय के रूप में दर्ज है। इसका पूरा श्रेय हम अपने बच्चों के विचारशील अभिभावकों को देते हैं, जिन्होंने सी.एम.एस. की विशिष्ट शिक्षा पद्धति के प्रति अपना अत्यधिक विश्वास व्यक्त किया और अपने बच्चों के जीवन को संवारने के साथ ही उन्हें एक अच्छा इंसान बनाने के लिए हमारे विद्यालय में शिक्षा लेेने के लिए भेजा।
               इसके साथ ही हम इसका श्रेय अपने उन अति परिश्रमी प्रधानाचार्याओं और विद्वान एवं अत्यन्त कठोर परिश्रमी शिक्षकों को देते हैं। जिनके कठोर परिश्रम, त्याग और बलिदान के कारण विगत कई वर्षों से सी.एम.एस. के छात्र आई.सी.एस.. की बोर्ड परीक्षाओं की राष्ट्रीय स्तर की मैरिट सूची में छाये हुए हैं। आज सी.एम.एस. के हजारों छात्र-छात्रायें विश्व एक परिवार की भावना के अनुरूप भारत के साथ ही विश्व के कई अन्य देशों में अपनी महत्वपूर्ण सेवायें दे रहे हैं।
               रही बात बच्चों को विश्व एकता की शिक्षा तथा विश्व नागरिक बनाने के मिशन को सफल मानने की तो हमारा मानना है कि काफी हद तक हम अपने मिशन में सफल रहे हैं, लेकिन हमें अभी और भी अधिक प्रयास करना है।
               इसके साथ ही हम आपको यह भी बताना चाहेंगे कि संसार के विभिन्न देशों के छात्र, टीचर्स तथा प्रधानाचार्य समय-समय पर सी.एम.एस. द्वारा प्रतिवर्ष आयोजित सर्वाधिक 28 अन्तर्राष्ट्रीय शैक्षिक समारोहों में प्रतिभाग करके वसुधैव कुटुम्बकम् तथा जय जगत की सीख तथा विश्व बन्धुत्व का संकल्प साथ लेकर जाते हैं। साथ ही विश्व के ये बच्चे अपने-अपने देश मेंवसुधैव कुटुम्बकम एवंजय जगतकी अवधारणा के इस सार्वभौमिक विचार को फैलाते हैं। इस प्रकार संसार के प्रत्येक बच्चे को गुणात्मक शिक्षा के द्वारा विश्व नागरिक बनाने का हमारा विश्व एकता मिशन हमेशा ऐसे ही चलता रहेगा, जिसके फलस्वरूप निकट भविष्य में सारे परिवार, समाज, राष्ट्र और विश्व में शांति एवं एकता अवश्य स्थापित होगी।
प्रश्नः (9) बच्चों को विश्व शांति एवं एकता की शिक्षा देने के कारण अभी तक आपको और सी.एम.एस. को कौन-कौन से प्रमुख अंतर्राष्ट्रीय तथा राष्ट्रीय पुरस्कार मिल चुके हैं?
उत्तर: सिटी मोन्टेसरी स्कूल को अपने बच्चों को दी जा रही विश्व एकता एवं विश्व शांति की शिक्षा के कारण मुझे मेरे विद्यालय को विभिन्न अंतर्राष्ट्रीय तथा राष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है। जिसमें सी.एम.एस. को संयुक्त राष्ट्र संघ के यूनेस्को द्वारा 30,000 अमरीकी डालर काअंतर्राष्ट्रीय शान्ति शिक्षा पुरस्कार-2002’ से सम्मानित किया। इसके साथ ही आई.सी.एस.सी. काउन्सिल द्वारा प्रदत्तडेरोजियो अवार्ड’, जर्मनी की संस्था द्वारा विश्व केन्यूक्लिर फ्री फ्यूचरकास्पेशल अचीवमेन्ट अवार्ड’, स्वीडन की संस्था द्वाराराइट्स आॅफ दी चाइल्डका अवार्ड, पोलेण्ड की ऐकेडमी आॅफ साइन्सेज द्वाराफ्रेण्ड आफ यंग फिजीसिस्ट अवार्ड’, वल्र्ड पीस प्रेयर सोसाइटी जापान द्वारा पीस रिप्रेसेन्टेटिव लखनऊ सम्मान, साम्प्रदायिक सौहार्द के लिये वारिस अली शाहकौमी एकतापुरस्कार, एशियन नोबेल प्राइज कहे जाने वाले फिलीपीन्स के अत्यन्त प्रतिष्ठित सम्मान ‘‘गुसी पीस प्राइज’’ आदि शामिल है। 
               इसके साथ ही हमारे द्वारा बच्चों के जीवन में विश्व एकता विश्व शांति के विचारों का बीजारोपण करने के लिए किये जा रहे अथक प्रयासों के लिए वर्ष 2009 में रूस सरकार की प्रख्यातबक्सीर स्टेट पोडागोजिकल यूनिवर्सिटी’, ऊफा (रूस) द्वारा मुझेडाॅक्टर आॅफ फिलाॅसिफीकी उपाधि दी गई। इस अवसर पर विश्वविद्यालय ने कहा है कि ‘‘इस विश्वविद्यालय ने एक मत होकर आपको पी.एच.डी. की मानद उपाधि देने का निश्चय किया है। और यह सम्मान आपके 50 वर्षो से अधिक समय से शिक्षा के माध्यम से सम्पूर्ण मानव जाति की सेवा के लिए दिया जा रहा है। जिसमें विशेषकर आपके उस योगदान के लिए जिसके अन्तर्गत आप शिक्षा के माध्यम से दुनियाँ भर की वर्तमान पीढ़ी के भविष्य को सुरक्षित करने तथा आगे जन्म लेने वाली पीढ़ियों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए प्रयासरत् हंै।’’
               इसके साथ ही मुझे 2012 में अर्जेन्टीना की दो प्रख्यात विश्वविद्यालयोंयूनिवर्सिटी आॅफ ऐनेट्री रिओसद्वारा एवं यूनिवर्सिटी आॅफ लाॅ मेन्डोजाद्वाराडाक्टरेट की मानद उपाधिसे भी सम्मानित किया गया। तथापि 2014 में पेरू की इंका ग्रिसेलसा विश्वविद्यालय द्वारा डाक्टरेट की मानद उपाधि से तथा 2015 में मंगोलिया की नेशनल लाॅ यूनिवर्सिटी द्वारा विधि के क्षेत्र में डाक्टरेट की मानद उपाधि से सम्मानित किया गया।
प्रश्नः (10) ऐतिहासिक तथा वैश्विक महामारी कोरोना काल में खासकर छात्रों की शिक्षा पर ज्यादा प्रभाव डाला है। आपका स्कूल सारे विश्व में 21वीं सदी की आधुनिक शिक्षा का रोल माॅडल बन गया है। ऐसे में आॅनलाइन क्लासेज का क्या फीड बैक है?
उत्तरः     आज से कुछ वर्ष पूर्व तक विज्ञान और प्रौद्योगिकी ने इतनी तरक्की नहीं की थी कि हम अपने बच्चों को आॅनलाइन पढ़ा सकते। लेकिन आज विज्ञान और प्रौद्योगिकी की सहायता से हम अपने बच्चों की पढ़ाई के लिये 24 मार्च 2020 से ही अनवरत् आॅनलाइन क्लासेज चला रहे हैं। तथा 30 जून तक ये आॅन लाइन क्लासेज चलेंगी। इसके साथ ही हम प्री-प्राइमरी, प्राइमरी और जूनियर कक्षाओं के बच्चों के लिए निःशुल्क आॅन लाइन समर कैम्प चला रहे हैं और यह कैम्प 30 जून तक चलेगा।
               हमारा मानना है कि बच्चों को सर्वश्रेष्ठ शिक्षा देने के लिए हर संभव तरीका अपनाया जाना चाहिए। वैश्विक महामारी कोविड-19 के इस विकट समय में हमारा विद्यालय अपने छात्रों को आॅनलाइन शिक्षा देने के लिए अत्यन्त सफलता के साथ निरन्तर आगे बढ़ रहा है। मुझे आपको बताते हुए हार्दिक प्रसन्नता हो रही है कि आॅनलाइन क्लासेज के माध्यम से हमारे विद्यालय के समस्त छात्र-छात्रायें पूरे उत्साह, मेहनत एवं लगन के साथ पढ़ाई कर रहे हैं। यह प्रक्रिया रोजाना सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक निरंतर चलती है और सबसे अच्छी बात यह है कि हमारे इस प्रयास से हमारे सभी अभिभावक भी बहुत खुश हैं।
¬प्रश्नः (11) आपकी दृष्टि में आज के वैश्विक महामारी कोरोना के अत्यन्त ही दुखदायी परिवेश मेंजय जगतकी भारतीय अवधारणा औरवसुधैव कुटुम्बकम्की महान संस्कृति एवं सभ्यता कितनी प्रासंगिक है?
उत्तरः     हमारा मानना है कि वर्तमान परिवेश में भारत कीवसुधैव कुटुम्बकम्अर्थात विश्व एक परिवार है और हम सब एक ही परमपिता परमात्मा की संताने हैं की प्राचीन संस्कृति एवं सभ्यता के साथ हीजय जगत्अर्थात् सारे विश्व की विजय हो की महान अवधारणा की प्रासंगिकता और भी अधिक बढ़ गई है। कोरोना वायरस के कारण विश्व भर में फैली कोविड-19 जैसी छिपी हुई बीमारी से विश्व की सारी मानवजाति को बचाने के लिए एक साथ प्रयास करना होगा।
               मानव इतिहास में प्रथम विश्व महायुद्ध के बाद लीग आॅफ नेशन्स तथा द्वितीय विश्व युद्ध के बाद संयुक्त राष्ट्र संघ का गठन हुआ था। तृतीय विश्व युद्ध से भी व्यापक वैश्विक महामारी कोरोना हमें वैश्विक लोकतांत्रिक व्यवस्था अर्थात विश्व संसद का गठन करने का मार्ग दिखा रही है।
               हमारा मानना है कि 20वीं सदी की शिक्षा ने बच्चों को संकुचित राष्ट्रीयता की प्रेरणा दी है, जिसके कारण 20वीं सदी महायुद्धों एवं महाविनाश की सदी रही है। 20वीं सदी में विश्व के सभी देशों के स्कूलों ने बच्चों को अपने-अपने देश से तो प्रेम करने की शिक्षा तो दी लेकिन उसके साथ ही उन्होंने बच्चों को शिक्षा के द्वारा सारे विश्व से प्रेम करना नहीं सिखाया। इसलिए विश्व के बदलते हुए परिदृश्य को देखने से ज्ञात होता है कि 21वीं सदी की शिक्षा का स्वरूप 20वीं सदी की शिक्षा से भिन्न अर्थात् 21वीं सदी की शिक्षा का स्वरूप विश्वव्यापी तथा मानव कल्याणकारी होना चाहिए। जिससे सारी मानव जाति से प्रेम करने वाले विश्व नागरिक विकसित हो सकें और जिनके प्रयास से सारे विश्व में शांति एवं एकता की स्थापना हो सके।
               मेरा पूरा विश्वास है कि जिस दिन विश्व के सभी नागरिक हमारे देश कीजय जगतअर्थात् सारे विश्व की विजय हो की प्राचीन भावना एवं पवित्र अवधारणा औरवसुधैव कुटुम्बकम् की महान संस्कृति एवं सभ्यता के अनुरूप सारे विश्व को अपना परिवार मानते हुए सारी मानवजाति की भलाई के लिए काम करना शुरू कर देंगे, और जिस दिन विश्व के सभी राष्ट्राध्यक्षों ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 51 की भावना के अनुरूप एक मंच पर आकर आपसी सहमति से वैश्विक लोकतांत्रिक व्यवस्था (विश्व संसद), विश्व सरकार और विश्व न्यायालय का गठन करने का सर्वसम्मति से निर्णय ले लिया, उसी दिन इस विश्व में स्थायी रूप से युद्ध, घातक शस्त्रों की होड़, आतंकवाद और हिंसा की जगह विश्व एकता तथा विश्व शांति स्थापित हो जायेगी।
               इसके बाद विश्व के अनेक देशों के बीच संभावित युद्धों तथा उसकी तैयारी पर खर्च होने वाली विशाल धनराशि से सारे विश्व के प्रत्येक नागरिक के लिए रोटी, कपड़ा, मकान, शिक्षा तथा स्वास्थ्य की समुचित व्यवस्था निश्चित रूप से हो जायेगी। जिसके परिणामस्वरूप विश्व में चारों ओर खुशहाली जायेगी। और मानव सभ्यता की गुफाओं से शुरू हुई विकास यात्रा का अन्तिम लक्ष्य सारे विश्व में आध्यात्मिक सभ्यता की स्थापना के साथ पूरा हो जायेगा।
प्रश्नः (12) सी.एम.एस. ने कोरोना राहत के लिए लगभग दो करोड़ रूपये का योगदान किया है। इस महामारी के चलते लम्बे समय तक स्कूल के लिए बड़ी चुनौतियां रहेंगी। क्या इन चुनौतियों से निपटने के लिए आपका भारत सरकार को कोई सुझाव है?
उत्तरः     इस महत्वपूर्ण एवं निर्णायक समय में सिटी मोन्टेसरी स्कूल ने अपनी सामाजिक उत्तरदायित्व को समझते हुए एक ओर जहां कोरोना वायरस के दुष्प्रभाव से उत्तर प्रदेश के नागरिकों के जीवन को बचाने के लिए माननीय मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ को एक करोड़ का चेक प्रदान किया। तो वहीं दूसरी ओर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में गरीब और असहाय लोगों तक भोजन पहुंचाने के लिए लखनऊ नगर निगम के तत्वाधान में चलाई जाने वाली 15 जनता रसोइयों के संचालन के लिए सी.एम.एस. ने 50 लाख रूपये का चेक दिया। तथा लखनऊ विकास प्राधिकरण द्वारा संचालित की जाने वाली 5 जनता रसोइयों के संचालन के लिए लखनऊ विकास प्राधिकरण को 20 लाख रूपये का चेक प्रदान किया।
               इसके साथ ही इस वैश्विक कोरोना महामारी के खात्मे एवं बचाव में इंडियन रेड क्राॅस सोसायटी की महत्वपूर्ण भूमिका को देखते हुए सी.एम.एस. ने 20 लाख रूपये का चेक इंडियन रेड क्राॅस सोसायटी को दिया है। इस प्रकार से सी.एम.एस. ने कुल एक करोड़ नब्बे लाख की धनराशि कोरोना राहत कार्यों के लिये दी है। तथापि सी.एम.एस. ने लखनऊ के पुलिस आयुक्त श्री सुजीत पाण्डेय को कोरोना महामारी की विभिन्न व्यवस्था के लिए 60 स्कूल बसें भी उपलब्ध कराई। इसके अतिरिक्त भी सी.एम.एस. ने लखनऊ विकास प्राधिकरण के द्वारा चलाई जा रही जनता रसोइयों के लिए 10,000 किलो अनाज भी उपलब्ध कराया।
               वास्तव में इस महामारी के साथ और उसके बाद भी हमें अभी कई चुनौतियों का सामना करना है। सी.एम.एस. अभी फिलहाल आॅनलाइन क्लासेज के माध्यम से बच्चों को शिक्षा दे रहा है जो 30 जून तक निरन्तर चलेंगी। तथापि प्री-प्राइमरी, प्राइमरी और जूनियर कक्षाओं के छात्रों के लिए निःशुल्क आॅन लाइन समर कैम्प चलाये जा रहे हैं। जो 30 जून तक निरन्तर चलेंगे। और आने वाले समय में सरकार द्वारा दिये गये दिशा-निर्देशों के अनुरूप बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सभी कार्य करेंगे। यहां हम इस बात का विशेष रूप से उल्लेख करना चाहते हैं कि सी.एम.एस. हमेशा से उत्तर प्रदेश सरकार एवं जिला प्रशासन के नियमों एवं आदेशों का पालन करता रहा है और आगे भी करता रहेगा। हमारा माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी से निवेदन है कि वे अपने देश कीजय जगत वसुधैव कुटुम्बकम्की महान संस्कृति, सभ्यता एवं भारतीय संविधान के अनुच्छेद 51 की भावना के अनुरूप विश्व की सारी मानव जाति की रक्षा के लिए अति शीघ्र वैश्विक लोकतांत्रिक व्यवस्था (विश्व संसद) के गठन की आवश्यकता को स्वीकार करते हुए विश्व के सभी देशों के राष्ट्राध्यक्षों को एक मंच पर इकट्ठा करने के लिए उचित कदम उठायें। हमारा विश्वास है कि जगत गुरू भारत ही विश्व संसद बनाने की पहल करके विश्व में एकता एवं शान्ति स्थापित करेगा। 

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